IAS Success Story UPSC Topper Ramesh Gholap पिता की मौत के बाद मां संग बेची चूड़ियां, आज हम IAS अफसर : देश की सबसे बड़े और कठीन संघ लोक सेवा आयोग ( Union Public Service Commission ) की सिविल सेवा परीक्षा ( Civil Services Exam 2022 ) को सबसे बड़ा माना जाता है। इस परिक्षा में लाखों की संख्या में छात्र-छात्राएं भाग लेते हैं, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं की सब पहली बार में सफलता हासिल कर लेते हैं। ऐसे कई छात्र हैं, जो सालों साल तक इसी तैयारी में लगे ही रहते हैं, लेकिन फिर भी कई प्रयासों में असफलता को पाते हैं, लेकिन एक न एक दिन वो सफलता हासिल कर ही लेते हैं।
आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। पिता के निधन के बाद सड़कों पर सामना तक बेचा, लेकिन फिर भी मेहनत कर अपना सपना पूरा किया। आज हम आपको आईएएस अफसर रमेश घोलप ( IAS Officer Ramesh Gholap ) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने अपना IAS अफसर बनने के सपने को पूरा कर दूसरों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। आईएएस ऑफिसर रमेश घोलप ने अपनी मुश्किलों को पीछे छोड़ा और कड़ी मेहनत से सफलता हासिल।
बचपन में ही हो गया था पोलियो / IAS Success Story
आईएएस ऑफिसर रमेश घोलप ( UPSC Topper IAS Ramesh Gholap ) बचपन में ही पोलियो के शिकार हो गए थे। रमेश जब छोटे थे तब उनके बाएं पैर में पोलियो हो गया था। साथ ही उनके घर की आर्थिक स्थिति भी कुछ खास ठीक नहीं थी। उन्होंने अपने जीवन में उस संघर्ष तक को देखा है जहां उन्होंने अपनी मां के साथ सडकों पर चूड़ियां तक बेचनी पड़ती थी। रमेश ने अपने जीवन में मुश्किलों से हार नहीं मानी और अंत में अपना सपना पूरा किया।
मां के साथ बेचनी पड़ी चूड़ियां / IAS Officer Ramesh Gholap
आईएएस रमेश घोलप ( IAS Ramesh Gholap ) का परिवार बहुत छोटा था, उनके परिवार में मात्र चार लोग थे। रमेश के पिता की एक छोटी सी साइकिल की दुकान थी। पिता को शराब पीने की आदत थी, जिसके चलते उनके परिवार को कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पिता की शराब पीने की वजह से निधन हो गया और उनकी आर्थिक परेशानियां और ज्यादा बढ़ गईं। ऐसे हालात में अब घर और परिवार का पूरा भार रमेश की मां पर आ गया। गुजारा करने के लिए मां ने चूड़ियां बेचनी शुरू कर दी। पैर में पोलियो होने के बावजूद रमेश अपनी मां और भाई के साथ मिलकर चूड़ियां बेचने का काम किया करते थे।
पिता के अंतिम संस्कार में जाने के लिए किराया तक नहीं था / IAS Ramesh Gholap
आईएएस रमेश घोलप ( Success Story Of IAS Ramesh Gholap ) ने अपनी शुरूआती पढ़ाई अपने गांव से ही पूरी की। इसके बाद आगे की पढाई के लिए वे अपने चाचा के घर बरसी चले गए। जब उनके पिता का निधन हुआ तब रमेश 12वीं की पढ़ाई कर रहे थे। पिता के निधन की खबर मिलने के बाद रमेश का घर जाना बेहद जरूरी था, लेकिन उनके पास अपने घर जाने तक का किराया नहीं था, जबकि उनके चाचा के घर से उनके घर तक का किराया मात्र 7 रुपये ही लगा करता था और विकलांगता के चलते उनका किराया केवल 2 रुपये था।
घर की जिम्मेदारी में सहयोग के लिए बने शिक्षक / IAS Success Story
12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद घर की जिम्मेदारी में हाथ बटाने के लिए एक डिप्लोमा किया और गांव में ही शिक्षक के तौर पर पढ़ाना शुरू कर दिया। पढ़ाने के साथ-साथ रमेश ने अपनी B.A की डिग्री भी हासिल कर ली। इसके बादे उन्होंने यूपीएससी ( Union Public Service Commission ) की तैयारी शुरू कर दी, जिसके लिए उन्होंने 6 महीने के लिए अपनी नौकरी भी छोड़ दी और पूरी मेहनत से तैयारी की। साल 2010 उन्होंने में पहली बार यूपीएससी ( UPSC CCE ) की परिक्षा दी, लेकिन इसमें वे असफल रहे। इसके बाद उनकी मां ने गांव वालों से कुछ पैसे उधार लेकर रमेश को पढाई के लिए बाहर भेज दिया।
बिना कोचिंग क्रैक कर ली यूपीएससी की परीक्षा
IAS Success Story UPSC Topper Ramesh Gholap : पुणे जाने के बाद रमेश ने बिना कोचिंग के यूपीएससी ( UPSC ) की तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत, लगन और परिश्रम के बाद आखिरकार उन्होंने साल 2012 में सिविल सर्विस परीक्षा क्रैक कर ली और 287वीं रैंक हासिल करके विकलांग कोटा के तहत रमेश घोलप आईएएस ऑफिसर ( Success Story UPSC Topper IAS Officer Ramesh Gholap ) बन गए।
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